CBSE OSM विवाद पर सियासत जारी: छात्रों के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने

Dheeraj Vishwakarma
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नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड Central Board of Secondary Education (CBSE) से जुड़ा ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। छात्रों की शिकायतों, मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवालों और OSM प्रणाली की खरीद प्रक्रिया की जांच के बीच केंद्र सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए CBSE के तत्कालीन चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है तथा OSM प्रणाली की खरीद और कार्यान्वयन की जांच के लिए समिति गठित की है।


क्या है OSM विवाद?

CBSE ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए On-Screen Marking (OSM) प्रणाली लागू की थी। लेकिन परिणाम जारी होने के बाद कई छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी में कथित गड़बड़ियों, धुंधले पन्नों, मूल्यांकन त्रुटियों, री-इवैल्यूएशन में देरी और तकनीकी समस्याओं की शिकायत की। इसके बाद OSM प्रणाली और उससे जुड़ी टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे।

कुछ रिपोर्टों में उत्तर पुस्तिकाओं के मिश्रण, गलत मूल्यांकन और ग्रेड आवंटन में त्रुटियों के आरोप भी सामने आए, जिससे छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई।

विपक्ष का सरकार पर हमला

विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस, ने सरकार की कार्रवाई को “आंखों में धूल झोंकने” वाला कदम बताया है। विपक्ष का कहना है कि केवल अधिकारियों का तबादला पर्याप्त नहीं है और इस पूरे मामले में उच्च स्तर की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने बड़े विवाद में केवल प्रशासनिक फेरबदल से समस्या का समाधान नहीं होगा।


संसद और जांच एजेंसियों की बढ़ी सक्रियता

मामला अब केवल छात्रों की शिकायतों तक सीमित नहीं रहा है। संसदीय समितियां, शिक्षा मंत्रालय और विभिन्न जांच एजेंसियां OSM प्रणाली से जुड़े पहलुओं की समीक्षा कर रही हैं। खरीद प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्था और मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता की जांच की जा रही है।

कुछ सांसदों ने OSM टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी मानकों में बदलाव और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए हैं।


सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार का कहना है कि मामले को पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच समिति गठित कर दी गई है और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार का दावा है कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और मूल्यांकन प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।

इसी क्रम में वरिष्ठ IAS अधिकारी Lokhande Prashant Sitaram को नया CBSE चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है।


छात्रों और अभिभावकों की चिंता

राजनीतिक बयानबाजी के बीच सबसे बड़ी चिंता छात्रों और उनके परिवारों की है। लाखों विद्यार्थियों के लिए बोर्ड परीक्षा का परिणाम उच्च शिक्षा और करियर की दिशा तय करता है। ऐसे में मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवालों ने छात्रों का भरोसा प्रभावित किया है।

कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना था, लेकिन यदि तकनीकी या प्रशासनिक कमियां सामने आती हैं तो उनका समय रहते समाधान होना आवश्यक है।


आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही साबित होती है तो प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई संभव है। साथ ही CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में बड़े सुधार भी किए जा सकते हैं।


निष्कर्ष

CBSE OSM विवाद अब केवल एक तकनीकी या प्रशासनिक मामला नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। एक ओर सरकार जांच और सुधार की बात कर रही है, वहीं विपक्ष जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। लेकिन इस पूरे विवाद के केंद्र में देश के लाखों छात्र हैं, जिनका भविष्य और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे और सरकार की आगे की कार्रवाई इस मुद्दे की दिशा तय करेंगे।

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