भारतीय छात्रों का Microplastics हटाने वाला Innovation चर्चा में

Dheeraj Vishwakarma
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इमली के बीजों से बनाया अनोखा समाधान, The Earth Prize 2026 में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

विशेष रिपोर्ट | विज्ञान और पर्यावरण डेस्क

भारत के तीन किशोर छात्रों द्वारा विकसित एक अनोखा पर्यावरणीय Innovation इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। 16 वर्षीय Vivaan Chhawchharia, Ariana Agarwal और Avyana Mehta ने “Plas-Stick” नामक एक विशेष तकनीक विकसित की है, जो पानी में मौजूद microplastics को हटाने में मदद कर सकती है। इस Innovation के लिए उन्हें The Earth Prize 2026 में Asia Winner घोषित किया गया है।


क्या है “Plas-Stick”?

“Plas-Stick” एक जैविक (Biodegradable) पाउडर है जिसे इमली (Tamarind) के फेंके गए बीजों से तैयार किया गया है।

यह पाउडर पानी में मौजूद Microplastics कणों को अपनी ओर आकर्षित करता है और उन्हें एक साथ जोड़कर बड़े गुच्छों (Clumps) में बदल देता है। इसके बाद इन गुच्छों को एक साधारण Handheld Magnet की मदद से हटाया जा सकता है।

सबसे खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में:

  • बिजली की जरूरत नहीं होती,
  • महंगे फिल्टर नहीं चाहिए,
  • और जटिल मशीनों का उपयोग भी नहीं करना पड़ता।

कैसे आया यह विचार?

रिपोर्ट्स के अनुसार यह विचार छात्रों को तब आया जब उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया।

उन्होंने देखा कि कई परिवार पीने का पानी बड़े कंटेनरों में संग्रहीत करते हैं, लेकिन उनके पास आधुनिक Water Filtration Systems उपलब्ध नहीं हैं। एक बच्चे को ऐसे ही पानी पीते देख उन्हें Microplastic Pollution की समस्या को लेकर चिंता हुई। इसी के बाद उन्होंने कम लागत वाला समाधान विकसित करने का निर्णय लिया।


Microplastics क्यों हैं बड़ी समस्या?

Microplastics प्लास्टिक के बेहद छोटे कण होते हैं जो:

  • नदियों,
  • झीलों,
  • समुद्रों,
  • बारिश के पानी,
  • और यहां तक कि पीने के पानी में भी पाए जाते हैं।

वैज्ञानिकों ने Microplastics को मानव रक्त, फेफड़ों, मस्तिष्क और अन्य अंगों में भी पाया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। हालांकि इनके दीर्घकालिक प्रभावों पर अभी भी शोध जारी है।


The Earth Prize 2026 में मिली बड़ी सफलता

इन तीनों छात्रों को The Earth Prize 2026 में Asia Region Winner घोषित किया गया।

The Earth Prize दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरणीय प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है, जिसमें 13 से 19 वर्ष की आयु के छात्र पर्यावरण से जुड़े समाधान प्रस्तुत करते हैं। इस वर्ष प्रतियोगिता में 169 देशों के हजारों छात्रों ने भाग लिया।

विजेता बनने पर टीम को अपनी तकनीक को आगे विकसित करने के लिए आर्थिक सहायता और अंतरराष्ट्रीय मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ है।


IIT Guwahati के साथ सहयोग

रिपोर्ट्स के अनुसार छात्रों ने अपने प्रोजेक्ट को और बेहतर बनाने के लिए Indian Institute of Technology Guwahati (IIT Guwahati) के विशेषज्ञों के साथ भी सहयोग किया है।

इस सहयोग के माध्यम से:

  • तकनीक की जांच,
  • वैज्ञानिक परीक्षण,
  • और बड़े स्तर पर उपयोग की संभावनाओं

पर काम किया जा रहा है।


क्यों खास है यह Innovation?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह Innovation कई कारणों से महत्वपूर्ण है:

✔️ कम लागत वाला समाधान
✔️ पर्यावरण-अनुकूल सामग्री का उपयोग
✔️ ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोग की संभावना
✔️ बिजली की आवश्यकता नहीं
✔️ कृषि अपशिष्ट (Tamarind Seeds) का उपयोग

इसी वजह से इसे Sustainable Innovation का अच्छा उदाहरण माना जा रहा है।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना

इस प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय मीडिया, पर्यावरण संगठनों और विज्ञान समुदाय से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

कई विशेषज्ञों ने इसे यह दिखाने वाला उदाहरण बताया है कि युवा छात्र भी वैश्विक पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।


जागरूकता अभियान भी चलाया

रिपोर्ट्स के अनुसार टीम ने केवल तकनीक विकसित ही नहीं की, बल्कि Microplastic Pollution के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हजारों छात्रों और शिक्षकों तक भी पहुंच बनाई है।

उनका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि Microplastics केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी चुनौती बनते जा रहे हैं।


विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार:

“स्थानीय संसाधनों से विकसित कम लागत वाले समाधान भविष्य की बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।”

हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले और परीक्षणों की आवश्यकता होगी।


निष्कर्ष

भारतीय छात्रों द्वारा विकसित “Plas-Stick” Innovation ने यह साबित किया है कि युवा सोच और वैज्ञानिक जिज्ञासा मिलकर बड़े पर्यावरणीय समाधान पैदा कर सकती हैं। इमली के बीजों से तैयार यह तकनीक Microplastic Pollution जैसी गंभीर समस्या से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

The Earth Prize 2026 में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान ने न केवल इन छात्रों को सम्मान दिलाया है, बल्कि भारत की युवा वैज्ञानिक प्रतिभा को भी वैश्विक मंच पर नई पहचान दी है।

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