अमेरिका के टैरिफ का भारत पर असर: फायदे ज़्यादा या नुकसान भारी?

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अमेरिका के टैरिफ का भारत पर असर वर्तमान में हर पolicymaker, industrialist और investor के लिए सबसे critical विषय बना हुआ है। अमेरिका द्वारा चीनी सामानों पर लगाए गए 50% या उससे अधिक के tariffs ने वैश्विक व्यापार की दिशा ही बदल कर रख दी है। जहाँ यह कदम चीन को निशाने पर लेता है, वहीं अमेरिका के टैरिफ का भारत पर असर (America ke tariff ka Bharat par asar) गहरा और बहुआयामी होने जा रहा है। क्या भारत इस ऐतिहासिक अवसर का लाभ उठाकर वैश्विक manufacturing hub बनने की राह पर अग्रसर होगा, या फिर global supply chain में उथल-पुथल की कीमत उसे चुकानी पड़ेगी? यहाँ है पूरा विश्लेषण।

  1. टैरिफ की घोषणा: एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि
  2. अमेरिका के टैरिफ का भारत पर सकारात्मक असर (5 बड़े फायदे)
    • 2.1. स्टील और अल्युमीनियम निर्यात में विस्फोट
    • 2.2. सोलर मैन्युफैक्चरिंग को मिली बड़ी धक्का
    • 2.3. इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर के लिए स्वर्णिम अवसर
    • 2.4. मेडिकल डिवाइसेज और फार्मा में नए दरवाजे
    • 2.5. FDI और रोजगार में वृद्धि
  3. अमेरिका के टैरिफ का भारत पर नकारात्मक असर (3 गंभीर चुनौतियाँ)
    • 3.1. इनपुट कॉस्ट में वृद्धि और महंगाई का जोखिम
    • 3.2. वैश्विक व्यापार युद्ध का खतरा
    • 3.3. तत्काल क्षमता विस्तार की चुनौती
  4. सरकार और उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
  5. भविष्य की रणनीति: आगे की राह क्या है?

1. टैरिफ की घोषणा: एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि

मई 2024 में, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन पर निशाना साधते हुए several strategic sectors पर टैरिफ में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की। इनमें स्टील और अल्युमीनियम (25%), सोलर सेल (50%), इलेक्ट्रिक वाहन (100%) और certain medical supplies शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि चीन अतिउत्पादन (overproduction) करके global markets को विकृत कर रहा है। इसका प्राथमिक लक्ष्य अमेरिकी manufacturers को protect करना है, लेकिन इसका ripple effect पूरी दुनिया में महसूस किया जाएगा, और अमेरिका के टैरिफ का भारत पर असर इसका एक major aspect है।

2. अमेरिका के टैरिफ का भारत पर सकारात्मक असर (5 बड़े फायदे)

चीनी उत्पाद महंगे होने से अमेरिकी importers को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश है। यहीं भारत के लिए massive opportunity पैदा हुई है।

2.1. स्टील और अल्युमीनियम निर्यात में विस्फोट

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा स्टील उत्पादक है। चीनी स्टील पर 25% tariff, भारतीय स्टील निर्यातकों के लिए एक game-changer साबित हो रही है। U.S. buyers के लिए भारतीय स्टील अब एक highly competitive विकल्प बन गया है। इसी तरह, अल्युमीनियम sector भी significant gains की उम्मीद कर रहा है।

2.2. सोलर मैन्युफैक्चरिंग को मिली बड़ी धक्का

अमेरिका ने सोलर सेल पर टैरिफ बढ़ाकर 50% कर दिया है। भारत ने PLI (Production Linked Incentive) स्कीम के तहत अपनी घरेलू solar manufacturing capacity बढ़ाने पर जोर दिया है। अब, U.S. market में भारतीय solar panels और cells की demand में तेजी से वृद्धि expected है। यह ‘Atmanirbhar Bharat’ initiative को एक बड़ा boost देगा।

2.3. इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर के लिए स्वर्णिम अवसर

EVs पर 100% tariff का मतलब है कि चीनी EVs अमेरिका में practically ban हो गई हैं। इससे भारत के लिए EV components, especially batteries और auto parts का निर्यात बढ़ने की strong संभावना है। भारत पहले से ही एक reliable auto parts supplier है।

2.4. मेडिकल डिवाइसेज और फार्मा में नए दरवाजे

कुछ medical devices और pharmaceutical ingredients पर भी tariffs लगाए गए हैं। भारत का मजबूत generic drugs और medical equipment industry अमेरिका को alternatives supply करने की perfect position में है।

2.5. FDI और रोजगार में वृद्धि

अमेरिका और अन्य देशों की companies अब China-centric supply chain से दूर जाना चाहेंगी। इस ‘China Plus One’ strategy के तहत, भारत foreign direct investment (FDI) के लिए एक prime destination बन सकता है। नई manufacturing units लगने से रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. प्रोनाब सेन ने एक interview में कहा, “यह भारत के लिए एक दशक में एक बार आने वाला अवसर है। हमें अपनी manufacturing efficiency और scale पर focus करना होगा ताकि हम चीन का sustainable alternative बन सकें।” पूरा विhttps://tazanews24x7.in/श्लेषण यहाँ पढ़ें ?

3. अमेरिका के टैरिफ का भारत पर नकारात्मक असर (3 गंभीर चुनौतियाँ)

हालाँकि, अमेरिका के टैरिफ का भारत पर असर पूरी तरह positive नहीं है। कुछ गंभीर जोखिम और चुनौतियाँ भी मौजूद हैं।

3.1. इनपुट कॉस्ट में वृद्धि और महंगाई का जोखिम

भारत की अपनी manufacturing कई मोर्चों पर चीनी raw materials और intermediate goods पर निर्भर है। अगर इनकी कीमतें बढ़ती हैं, तो भारतीय manufacturers की input cost बढ़ेगी। इससे घरेलू महंगाई (inflation) पर दबाव बन सकता है और उनकी export competitiveness भी प्रभावित हो सकती है।

3.2. वैश्विक व्यापार युद्ध का खतरा

कहीं यह कदम एक बड़े global trade war की शुरुआत तो नहीं? अगर चीन जवाबी कार्रवाई करता है या अन्य देश protectionist policies अपनाते हैं, तो इससे पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था सिकुड़ सकती है, जिसका negative असर भारत के overall exports पर पड़ेगा।

3.3. तत्काल क्षमता विस्तार की चुनौती

क्या भारत अचानक बढ़ी हुई वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए तैयार है? तत्काल production capacity बढ़ाना, quality standards maintain करना और competitive prices offer करना एक बहुत बड़ी logistical challenge है।

भारत की उत्पादन संबद्ध योजना (PLI Scheme) पहले से ही इन चुनौतियों का समाधान करने का काम कर रही है। यह घरेलू manufacturing को बढ़ावा देकर चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी। PLI योजना के बारे में https://tazanews24x7.in/यहाँ और जानें 

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